दिनचर्या में क्या करें और क्या न करें ? दिनचर्या कितनी महत्वपूर्ण है ?

दिनचर्या कैसी होनी चाहिए ? 

दिनचर्या स्वास्थ्य के विचार से दिन रात में क्या काम, कैसे और कब करना चाहिए इसके कुछ नियम प्राचीन कल से ही भारतीय जीवन परम्परा में चले आ रहे हैं आज आधुनिक युग में लोग इनका सही से पालन करना भूल गए है इस कारण स्वास्थ्य पूर्ण स्वस्थ नहीं रहते है । दिनचर्या के प्राचीन नियम हमारे देश की जलवायु और सामाजिक स्थिति के अनुकूल निर्धारित हैं इसलिए पूर्ण स्वस्थ रहने की इच्छा रखनेवाले हर भारतवासी को इनका अवश्य ही पालन करना चाहिए । सिंधिया को मिल सकती है मोदी कैबिनेट में जगह अगस्त में…

प्रातःकाल उठाना   

दिनचर्या नित्य ही सूर्योदय से इतना पहले जागकर बिस्तर छोड़ देना चाहिए की शौचादि से निवृत होकर साफ़-सुथरा और प्रसन्न मन से उगते हुए सूर्य को देख लिया जाये । गरमी के दिनों में 4 बजे और शर्दी के दिनों में 5 बजे प्रातः बिस्तर त्याग देना चाहिए। हमारे ऋषिमुनियों ने ब्रह्ममुहूर्त को अति लाभदायक बताया है यह सूर्योदय से 4 घडी पूर्व का समय होता है । इस समय शुद्ध  वायु ग्रहण की जा सकती है । इस समय तक पशु-पक्षी और नवजात शिशु उठ जाते है । ब्रहममुहूर्त सोकर उठने का प्राकृतिक नियम है । जिन्हें देर तक सोने की आदत है उन्हें सुधार कर लेना चाहिए अन्यथा इसके परिणाम घातक हो सकते है । सुबह समय से उठने से चहरे पर तेज आता है शरीर सुन्दर और स्वस्थ बन जाता है ।Ancient Biology Science In TheVedas

शीतल जल पीना 

प्रात: सोकर उठने के पश्चात शीतल जल पीकर शारीरिक क्रिया करने से पूर्व शौच आदि से निवृत हो जाना चाहिए । आजकल लोग सुबह उठकर बेड टी में गरमा-गर्म चाय का सेवन करते है जबकि हमारे देश की जलवायु उष्ण है इसलिए सुबह उठकर ठंडा पानी पीना चाहिए । इससे मस्तिष्क धुलता है बुद्धि बढ़ती है नेत्र की ज्योति बढ़ती है । बाल जल्दी सफ़ेद नहीं होते है । असमय बुढापा नहीं आता है । योगी सरकार का आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नया दांव अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल

शौच जाना

प्रात:कालीन शरीरिक क्रियाओं करने से पूर्व ठंडा जल पीकर शौचादि को जाना चाहिए । बचपन से ही बच्चों में सुबह समय से उठकर ठन्डे पानी का सेवन कर शौचादि की आदत डालनी चाहिए ।इससे दिनभर चित्त प्रसन्न रहता है ।

प्रात: घूमना 

संसार के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों, विचारकों, वैज्ञानिकों का मत है की प्रात:काल को शुद्ध वायु में टहलना स्वास्थ्य के लिए बहुत हितकर है । इसलिए प्रतिदिन शौचदि से निवृत होकर पार्क आदि में जाकर शुद्ध वायु का आनंद लेना चाहिए । शुद्ध वायु लेने से फेफड़ों की उम्र बढ़ती है । निरंतर चलने वाली बीमारी ख़त्म हो जाती है ।  दिनचर्या जो विद्यार्थी खेल-कूद आदि क्रियाओं में अत्यधिक परिश्रम कर लेते है वह सुबह घुमने के बजाय उस समय का उपयोग अपनी पढ़ाई के याद रखने योग्य अर्थों और विषयों की पुनरावृत्ति में किया करें । प्रात: काल मनन करना सेहत के लिए अच्छा होता है। क्योंकि इस समय बुद्धि ताजा और निर्मल होती है ।  सुबह उठकर 1 से 2 किलोमीटर सपाटा दौड़ लागाई जाय तो मन्दाग्नि के रोग में तत्काल लाभ मिलता है । थकावट भी कम होती है ।Bhagat Singh – सजा के बाद वाला पत्र || पहली प्रतिक्रिया

व्यायाम/तेल मालिश

जब सूर्य की भीनी-भीनी धूप आने लगे तब शरीर में तैल मालिश करनी चाहिए जो शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक होती है। इसी प्रकार थोड़ा व्यायाम करना चाहिए। विद्यार्थी वर्ग और लिखा-पढ़ी का कार्य करने वाले या जिनको शारिरिक श्रम कम करना पड़ता है। उनको अवश्य ही व्यायाम कर लेना चाहिए। सूर्य नमस्कार ही सबसे उत्तम व्यायाम है। तैल मालिश व्यायाम के बाद ही करनी चाहिए। व्यायाम और मालिश करने के बाद कम से कम 15 मिनट तक आराम करना चाहिए।

स्नान करना

उत्तम स्वास्थ्य के लिए नित्य शीतल जल से स्नान करना चाहिए। अनुकूल न हो तो शर्दी में गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। थोड़े पानी से नहाना व्यर्थ है। नदी में तैरकर अच्छी तरह रगड़ कर नहाना चाहिए, व खुरदरे तौलिये से पोंछकर मैल को बदन से साफ कर लेना चाहिए।ईश्वर सर्वव्यापक होकर सबको देखता है। Omnipresent God

आराधना 

स्नान करने के बाद यथासंभव ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। प्रतिदिन संध्या और उपासना करनी आवश्यक है। इससे मन को शांति मिलती है, व मुसीबत का डटकर सामना करने का साहस उतपन्न होता है। 

नाश्ता

स्नान व ईश्वर की उपासना करने के बाद जिन्हें स्कूल या दफ्तरों में जाना होता है। उन्हें सुबह हल्का नाश्ता कर लेना चाहिए। जिन्हें दिन में केवल दोपहर को खाली समय मिलता है उन्हें अवश्य ही सुबह नाश्ता कर लेना चाहिए। दिल बेचारा’ का ट्रेलर देख बॉलीवुड सेलेब्स ने कुछ यूं दिया रिएक्शन…

भोजन 

आज के युग में नियमानुसार भोजन करना बहुत कठिन है। सभी को प्रत्येक दिन खाने के लिए एक समय नही मिलता है लेकिन अगर यह समय निश्चित हो जाये तो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। भोजन करने के तुरंत बाद कम से कम 30 मिनट तक आराम कर लेना चाहिए फिर कार्य में लगना चाहिए। जिन्हें सुबह नाश्ता किया है व स्कूल या दफ्तर में जाना है उन्हें 2-3 बने खाना खा लेना चाहिए। मौसम अनुसार उत्तम पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। भोजन के उपरांत पानी बिल्कुल भी नही पीना चाहिए। दुनिया के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति बने मुकेश अंबानी

जीविकोपार्जन 

दैनिक जीविका कार्य को सदैव अपना कर्तव्य मानकर पूरी ईमानदारी, निष्ठा, उचित परिश्रम से और मन लगाकर करना चाहिए। किसी भी कार्य में शक्ति से अधिक परिश्रम नही करना चाहिए, न ही कमजोरी की आदत डालनी चाहिए। अगर आप अपना काम मुस्तैदी से करेंगे तो आपका मन सदा स्वस्थ, संतुष्ट, प्रसन्न रहेगा। अगर काम से जी चुराएँगे तो काम दिखावटी कार्य करेंगे या बेईमानी और भर्ष्टाचार करेंगे। इससे आपका मन भयभीत, शंकित।  -आलोक आर्य 

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